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अदरख | Ginger (Zingiber officinale)

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अदरख Ginger

इसे अन्य भाषाओ में आदी, आद्रिका, आलेग, आदा, अदरक, इमिशोठ आदि नामो से जाना जाता है। भारत देश में अदरक की हर जगह खेती होती है। यह एक झाड़ की तरह होता है। जो 18-20 इंच ऊँचा होता है। इसके जड़ में एक प्रकार का कंद रहता है जिसे अदरक कहते है। अदरक खासकर दो प्रकार के होते है। एक रेशेदार और दूसरा बिना रेशेदार। यह गर्मी के मौसम में बोया जाता है।

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अदरख के गुण Adrakh ke gun

  • ये भारी, पाक में मधुर, चरपरा, तीक्ष्ण, उष्ण, वात, कफनाशक होता है।
  • अदरक कुष्ठ, पांडुरोग, मूत्रकृच्छ, रक्त-पित्त, ज्वर, दाह, आदि में लाभदायक होता है।

अदरख विभिन्न रोगो में फायदेमंद Adrakh vibhinn rongo me faydemand

  • 5 तोले ताजे अदरख का रस निकालकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेने से जलोदर के रोगियों को ठीक करता है। प्रतिदिन ढाई तोला बढ़ाते हुए साथ में बराबर मात्रा में मिश्री लेकर 25 तोले तक बढ़ाना चाहिए। फिर ढाई तोले के हिसाब से घटाना चाहिए।
  • एक ग्राम अदरक के रस के साथ एक ग्राम प्याज का रस मिलाकर देने से उलटी आना तथा जी मिचलाहट बंद हो जाती है।
  • अदरक का रस एक मिली. और आक की जड़ एक ग्राम इन दोनों को मिलाकर कूट ले की गोली बनाने लायक हो जाये, फिर इसको कालीमिर्च के बराबर गोली बना ले। इन गोलियों को गुनगुने पानी के साथ देने से हैजे में बहुत लाभ पहुँचता है।
  • आदी के रस व तुलसी के रस समान भाग लेकर थोड़ी सी शहद अथवा थोड़ी सी मोर के पंख के भस्म मिलाने से हैजे में लाभ पहुँचता है।
  • आद्रिका के रस में शहद मिलाकर चाटने से श्वांस, खांसी, जुकाम व कफ में काफी आराम मिलता है।
  • आलेग के छोटे से टुकड़े को सोते समय मुंह में रखकर चूसते हुए सो जाये इससे सर्दी, खांसी, जुकाम आदि में बहुत लाभ मिलता है।
  • अदरक के 300 मिली. रस लेकर उसकी आधा मात्रा में तिल्ली का रस डालकर आग पर गर्म कीजिये। जब रस जल कर तेल मात्र रह जाये तो तब उसे उतार कर छान लेना चाहिए। इस तेल को शरीर पर मालिश करने से जोड़ो की वात पीड़ा मिट जाती है।
  • आदी के रस को हल्का गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द मिट जाता है।
  • इसके रस में निम्बू के रस को मिलाकर पीने से मंदाग्नि दूर होती है।
  • आदा, त्रिफला और गुड़ तीनो को मिलाकर पीने से कामला मिटता है।
  • सर्दी में अदरक के टुकड़े को दांत के बीच दबाकर रखने से दांत में होने वाला दर्द दूर होता है।
  • इसके स्वरस में पुराना गुड़ मिलाकर पिलाने से सारे शरीर के सूजन नष्ट हो जाती है। परन्तु इस का सेवन करते समय सिर्फ बकरी का दूध पिलाना चाहिए।

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