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इसबगोल Isbagol (Plantago Ovata) के गुण फायदे और लाभ

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इसबगोल Isbagol

इसे अन्य भाषाओं में इषड्गोलम, स्निग्धबीजम, इसपगुल, हॅस्पगुल, इस्पगलम्, वजरेक़ुतुना आदि नामो से जाना जाता है। ये भारत के पंजाब, मालबा और सिंध में इसबगोल के कुछ प्रजातियां पायी जाती है। ये मुख्य रूप से अरबियन गल्फ एवं पर्सिया में पाया जाता है।

इसबगोल का सामान्य परिचय

यह एक झाड़ी नुमा पौधा होता है, जो लगभग एक गज ऊँचा होता है। इसके पत्ते धान के पत्तो के समान और इसकी डालियाँ बारीक होती है। डाली के सिरे पर गेहूं के तरह की बालियां लगती है। इन बालियों में बीज रहते है। इसके बीजों के ऊपर महीन और सफ़ेद रंग की झिल्ली होती है। यह झिल्ली ही उतारने पर इसबगोल की भूसी के रूप में हो जाती है। यही इसबगोल की भूसी पाने का केंद्र है।

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इसबगोल के आयुर्वेदिक गुण

इसके बीज शांतिदायक, शीतल, और प्रकृति में मुलायम होते है। ये साफ़ दस्त लाते है। मलावरोध या कब्ज को दूर करने वाले होते है। पेट की मरोड़, अतिसार, पेचिस आंतो के घाव में भी यह औषधि बहुत ही लाभदायक होता है।
इसबगोल पुराना से पुराना दमा या श्वांस लेने परेशानी को दूर करता है। इसके सेवन करने से उष्ण प्रकृति के रोगियों को होनेवाले शुक्रमेह में भी यह औषधि बहुत लाभदायक होती है।

इसबगोल के लाभ

  • इसके बीज को ठन्डे पानी में भिगोकर उनके लुआब को छानकर पिलाने से खुनी बवासीर में बहुत फायदा होता है।
  • इसबगोल की भूसी, शीतल मिर्च और कल्मीशीरे की फंकी लेने से मूत्रकृच्छ में बहुत फायदा होता है।
  • गठिया और जोड़ो के दर्द में इसका पोटली में लेकर बाँधने से लाभ होता है।
  • बुरे के साथ इसबगोल का पानी मिलाकर पिलाने से पेशाब की जलन मिटती है।
  • लगातार एक साल तक सुबह शाम इसबगोल की फंकी लेने से सभी प्रकार की श्वांस की बीमारी में फायदा होता है।
  • इसको सिरके में पीसकर कनपटियों पर पतला लेप करने से नकसीर बंद हो जाता है।
  • एक तोले इसबगोल का लुआब निकालकर उसमे बूरा मिलाकर पिलाने से पतोन्माद मिटता है।
  • इसबगोल की भूसी को पानी में भिगोकर पीने से कब्ज(Constipation) दूर होता है।

नोट:- ऐसा कहा जाता है कि इसबगोल के पीसने से वह जहरीला हो जाता है इसलिए खाने के उपयोग में से पीसकर नहीं लेना चाहिए। बल्कि भिगोकर या भूसी निकालकर इसका उपयोग करना चाहिए।

इसबगोल लेने की विधि

  • स्वच्छ सूखे बीज एक कप भर पानी में डालकर धो लिए जाते है। धोने के बाद उनमे एक या दो चम्मच शक़्कर मिलाकर लेते है।
  • इसके बीज को एक कप पानी में भिगो देते है, करीब आधे घंटे में ये फूल जाते है फिर इसके पानी में कुछ शक्कर की मात्रा में मिलाकर ले सकते है।
  • कब्ज या मलावरोध में इसबगोल की भूसी को दस ग्राम की मात्रा में एक कप पानी में भिगोकर और उसमे कुछ शक्कर की मात्रा डालकर लेने से ये समस्या दूर होती है।

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