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क्षय रोग (Tuberculosis)

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क्षय रोग टी. बी.(Tuberculosis)

क्षय रोग को आम भाषा में टी बी भी कहा जाता है। ये एक संक्रामक बीमारी है, जो मायकोबक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस (Mycobacterium Tuberculosis) नामक जीवाणु से होता है, जो हवा के माध्यम से एक इंसान से दूसरे में इंसान फैलती है। यह सामान्यतः फेफड़ों से शुरू होती है। लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी जैसे शरीर के किसी भी पार्ट्स में हो सकता है। ये ज्यादातर हमारे फेफड़ो पर प्रभाव करता है। टी बी किसी भी उम्र वाले लोगो को हो सकता है। इस बीमारी से पुरे विश्व में लगभग 25 लाख लोगो की हर साल मृत्यु होती है भारत में लांखो लोग हर साल इस बीमारी से शिकार होते है।

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टी बी होने के लक्षण

  • दो हफ्तों ज्यादा खांसी आना,
  • खांसी के साथ बलगम और बलगम में कभी-कभी खून का आना,
  • रात या सुबह के समय बुखार होना,
  • रात में ज्यादा पसीना होना,
  • हेमोप्टेसाइज (खून से सना हुआ थूक खांसते हुए),
  • वजन ज्यादा घटना,
  • थकान और सीने में दर्द होना,
  • साँस लेने में परेशानी होना,
  • भूख न लगना।

टी बी होने के कारण

  • माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बैक्टीरिया टीबी का कारण बनता है। टीबी जीवाणु हवा के माध्यम से फैलता है।
  • संक्रमित व्यक्ति द्वारा हवा में उत्सर्जित सूक्ष्म कणों के संपर्क से यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के खांसने या थूकने से पास खड़े व्यक्ति को हवा में फैलकर उसके शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है।
  • जिस व्यक्ति को एच आई वी हो उसे टी बी होने का खतरा बढ़ जाता क्युकी उसका इम्यून सिस्टम कमजोर हो रहा होता है।
  • संक्रमित व्यक्ति से बात करने के दौरान भी टी बी होने का खतरा रहता है।
  • मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग टीबी के लक्षणों का अनुभव नहीं कर सकते हैं, लेकिन ये निष्क्रिय टीबी के रूप में जाना जाता है।
  • डब्लूएचओ के मुताबिक, दुनिया की आबादी का लगभग एक-तिहाई भाग टीबी से ग्रसित है। निष्क्रिय टीबी संक्रामक नहीं है, लेकिन सक्रिय टीबी आपको और दूसरों को बीमार बना सकता है।

टी बी का इलाज

  • भारत में टी बी के प्राथमिक रोगियों का इलाज या उपचार डायरेक्ट ऑब्जरवेशन ट्रीटमेंट के द्वारा होता हैं|
  • टी बी में दी जाने वाली एंटीबायोटिक ध्यान से ले जैसा आपके चिकित्सक सलाह दिया है।
  • मरीज के स्थान को साफ सुथरा रखे और उनको भी साफ सुथरा रखे।
  • एक साफ-सुथरा रुमाल अपने पास रखे।
  • खाने से पहले हाथ को अच्छी तरह से धूल लिया करे।
  • खुले हुए स्थानों पर जाये तो रूमाल से मुंह ढक लिया करे।
  • हरे पत्ते दार सब्जिया खाये जैसे पालक, सरसो का साग, मेथी का साग।
  • मल्टीविटामिन खाद्य पदार्थ ज्यादा खाये या डॉक्टर द्वारा दिए गेट मल्टीविटामिन टेबलेट ले।
  • बाहर और धुल भरी गन्दी जगहों पर जाने से बचे।
  • फल-फ्रूट ज्यादा खाये जिससे आपको कमजोरी महसूस न हो।

नोट:- ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण दिखाई दे तो अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर चिकित्सक से परामर्श ले।

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