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टिटनस के लक्षण कारण और उपचार

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टिटनस Tetanus

टिटनस का कारण क्लोस्ट्रीडरियम टिटानी(Clostridium Tetani ) नामक बैक्टीरिया होता है। यह बैक्टीरिया शरीर में हुए घाव में संक्रमण उत्पन्न करता है जिससे टिटनस हो जाता है। धीरे-धीरे ये पूरे शरीर में जहर की तरह फैलने लगता है। जिससे व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। ये किसी भी उम्र के लोगो को हो सकता है।
टिटनस एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है जो आपके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है जिससे मांसपेशियों में दर्द और जकड़न बहुत अधिक रहता है। विशेषकर ये जबड़े और गर्दन के मांसपेशियों में होता है। टिटनस सांस लेने में समस्या उत्पन्न करता है। जिस कारण से जान भी जा सकती है। टिटनस को आमतौर पर लॉकजॉ(Lockjaw) के नाम से जाना जाता है।

टिटनस के लक्षण Tetanus ke lakshan

टिटनस के जीवाणु एक हफ्ते या दस दिन के अंदर शरीर के घाव के माध्यम से पूरे शरीर में फैलते है।
इसके लक्षण है:-

  • जबड़े की मांसपेशियों में जकड़न और ऐठना
  • गर्दन की मांसपेशियों की कठोरता
  • निगलने में कठिनाई
  • पेट की मांसपेशियों में ऐठन और कठोरता
  • शरीर में दर्द के साथ देर तक चक्कर आना
  • बुखार आना
  • पसीना आना
  • उच्च रक्तचाप
  • तीव्र हृदय गति आदि।

टिटनस के कारण Tetanus ke karan

टिटनस के लगभग सभी मामलो में देखा जाये तो यही सामने आता है कि जो लोग टिटनस का टीका न लगवाए उन्ही को ये संक्रमण होता है।

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  • टिटनस के खिलाफ टीकाकरण न करवाना या प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत न होना
  • किसी धातु से चोट लग जाने पर उसे साफ़-सफाई से न रखना इससे टिटनस के बैक्टीरिया उत्पन्न होने लगते है
  • किसी जानवर या ऐसे व्यक्ति का नाखून लग जाने से जो टिटनस से पीड़ित हो
  • किसी भी धातु की कील लगना
  • टैटू बनवाने के कारण
  • बंदूक की गोली के घाव
  • कम्पाउंड फ्रैक्चर
  • सर्जिकल घाव
  • लगाया हुआ इंजेक्शन के उपयोग करने से
  • पशु या कीट के काटने
  • संक्रमित पैर में उल्सर से
  • दांत में संक्रमण होने से
  • अपर्याप्त प्रतिरक्षित माताओं के जन्मजात नवजात शिशुओं में संक्रमित नाभि।

टिटनस के उपचार Tetanus ke upchar ya ilaj

चिकित्सा उपचार के दो उद्देश्य हैं:-

  • बढ़ते हुए जीवाणुओं को रोकना या मारना।
  • टिटनस के जीवाणुओं के असर को बेअसर करना।
  • टिटनस रोग में एंटीबायोटिक्स (उदाहरण के लिए, मेट्रोनिडाज़ोल, पेनिसिलिन जी या डॉक्सीसीक्लीने ) बैक्टीरिया को मारने के लिए, टेटनस शॉट, यदि आवश्यक हो, और कभी-कभी, एंटिटॉक्सिन (टेटनस प्रतिरक्षा ग्लोबुलिन या टीआईजी) को विष को बेअसर करने के लिए देते है।
  • किसी भी घाव में जीवाणु संग्रह होने से पहले घाव का साफ-सफाई जरुरी है। यदि रोगी में किसी भी तरह के जीवाणुओं सम्बन्धी समस्या हो तो टीआईजी आमतौर पर पहले दी जाती है। टीआईजी विष को निष्क्रिय कर देती है क्योंकि संक्रमित घावों में हेरफेर करने पर विष बढ़ हो सकता है।
  • आवश्यकतानुसार दर्द दवा लेना।
  • मांसपेशियों में जकड़न और ऐठन के लिए डायजेपाम जैसी दवा इस्तेमाल की जाती है।
  • श्वास लेने में समस्या होने पर सांस लेने के लिए आप वेंटिलेटर का इस्तेमाल करते है।
  • नियमित चोटों में एंटी-टेटनस सीरम की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी प्रयोग बहुत दूषित चीज से लगे घाव और गंदे घाव में की जाती है और चोट के लगने के बाद पहले के छह घंटों के भीतर इसे लगा दिया जाना चाहिए।
  • ज्यादा घाव नहीं है तो करीब 24 घंटे के अंदर टिटनस टॉक्सॉयड का इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए।

नोट:- ऊपर दिए हुए टिटनस के लक्षणों के आधार पर टिटनस के लिए कोई भी दवा लेने से पहले चिकित्सक से संपर्क करे।

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