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धातु गिरने के लक्षण, कारण और घरेलु इलाज

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धातु का गिरना या धात रोग (शुक्रमेह)

इसे अंग्रेजी में स्पर्मेटोरिया(Spermetoriya) कहते है। आजकल के समय में बहुत से लोग धातु रोग से पीड़ित है, इसमें खासकर युवा या किशोरवस्था के लोग है। ये रोग खासकर अधिक मन में कामुक विचार आने से, अश्लील साहित्य, अश्लील फिल्मे देखने के कारण होता है। इस कारण से व्यक्ति के मन में अत्यधिक कामुकता आ जाती है जिससे व्यक्ति अप्राकृतिक हस्तमैथुन का शिकार हो जाता है। इस तरह के समस्या आ जाने से व्यक्ति को अनेक रोग का सामना करना पड़ता है।
इसमें व्यक्ति के धातु में दुर्बलता, धात की ज्यादा मात्रा में गिरना आदि। धातु की दुर्बलता में व्यक्ति के वीर्य में पतलापन आ जाता है इससे सम्भोग के समय जल्दी स्खलित हो जाना। पेशाब करते समय वीर्य का लार की तरह निकलना, लिंग का अपूर्ण उत्थान, उत्थान से पहले से ही लिंग से धातु गिरना शुरू हो जाना आदि समस्याएं धातु दुर्बलता कहलाता है।

धातु रोग के लक्षण

  • मल या मूत्र त्याग करते समय जोर लगाने पर इन्द्रिय के मुख से वीर्य के बुँदे टपकना
  • इन्द्रिय की नसों में ढीलापन आ जाना
  • वीर्य में पतलापन आ जाना
  • किसी कारणवश थोड़ा दबाव पड़ने पर वीर्य का बहना
  • कमर व पूरे शरीर में दर्द महसूस होना
  • उठते-बैठते चक्कर आना
  • कमजोरी महसूस होना आदि।

धातु रोग होने के कारण

  • अधिक कामुक विचार रखना
  • अश्लील कहानिया पढ़ना या फिल्मे देखना
  • मन की अशांति
  • शोक
  • मन में अप्रसन्नता होना और किसी काम में मन ना लगना
  • दिमागी कमजोरी
  • शरीर में पौषक तत्वों विटामिन्स की कमी
  • शरीर में मांस, अस्थि, मजा सही मात्रा में ना होना
  • ज्यादा चिंता होना
  • पौरुष द्रव का पतला होना
  • नसों में कमजोरी
  • पौरुष द्रव को व्यर्थ में निकालना
  • किशोरावस्था में ही धुम्रपान शुरू कर देना
  • ज्यादा चर्बी युक्त भोजन करना आदि।

धातु का गिरना या धात रोग (शुक्रमेह) के घरेलु इलाज

  • सफ़ेद मुसली धातु दुर्बलता और स्नायु दुर्बलता में बहुत फायदेमंद है। इसलिए प्रतिदिन 10 ग्राम सफ़ेद मुसली का चूर्ण – देशी गाय के दूध के साथ निरंतर प्रयोग करने से धातु रोग ठीक हो जाता है। इस प्रयोग का उपयोग जब तक धातु दुर्बलता ठीक न हो जाए तब तक किया जा सकता है।
  • धातु रोग में नीमगिलोय (गिलोय जो नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई हो) रामबाण औषधि और अचूक उपचार साबित होती है। सबसे पहले नीमगिलोय की कच्ची डंठल को छाया में सुखा ले , अच्छी तरह सूखने के बाद इसे कूट कर महीन चूर्ण बना ले। इस चूर्ण का इस्तेमाल 5 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ प्रतिदिन 45 दिन तक सेवन करने से निश्चित ही धातु दुर्बलता या धातु रोग में आराम मिलता है। स्नायु दुर्बलता में भी फायदेमंद है।
  • तुलसी की जड़ को अच्छी तरह सुखाकर उसका चूर्णं बना लीजिये अब इस चूर्णं को एक ग्राम की मात्रा में ले और एक ग्राम अश्‍वगंधा का चूर्णं में मिक्स कर के खाएं और ऊपर से दूध पी जाएं इससे आपको बहुत फायदा होगा।
  • तुलसी के पांच ग्राम बीज को मिश्री के साथ पीसकर प्रतिदिन दोपहर के भोजन के बाद लेने से धात रोग में बहुत लाभदायक है।
  • पका पपीता का फल या एक गिलास जूस पीने से धातु दुर्बलता दूर होता है और पेट को साफ़ रखता है।
  • छोटी इलायची और सेकी हुई हींग को लगभग तीन रत्ती चूर्ण में दूध में मिलाकर पीने से पेशाब में धातु आना बंद हो जाता है।
  • उड़द के दाल को पीसकर गाय की घी में भून ले और उसे खांड में मिलाकर खाने से बहुत लाभ मिलता है और इससे सम्भोग करने की क्षमता बढ़ाती है।
  • सुबह खाली पेट आंवले के थोड़े से जूस में दो चम्मच शहद डालकर पीने से शुक्रमेह में बहुत आराम मिलता है।
  • आंवले के एक चम्मच चूर्ण को एक गिलास दूध के साथ लेने से धातु गिरना बंद हो जाता है।
  • अश्वगंधा और शतावरी के चूर्ण को मिलाकर सेवन करने से धातु दुर्बलता में कमी आती है और वीर्य गिरना बंद हो जाता है।

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