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नेत्र शोथ, आँख आना घरेलू उपचार

Conjunctivitis, नेत्र शोथ, आँख आना घरेलू उपचार
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नेत्र शोथ, आँख आना (अंग्रेज़ी: Conjunctivitis या “pink eye” या “Madras eye” जिसे ‘पिंक आई’ या ‘कंजंक्टिवाइटिस’ भी कहा जाता है। आँख की बाहरी पर्त कंजंक्टिवा और पलक के अंदरूनी सतह के संक्रमण को कहते हैं। स्थानीय भाषा में इसे “आँख आना” भी कहते हैं। यह ज्यादातर एलर्जी या संक्रमण (सामान्यतः विषाणु किंतु कभी-कभी जीवाणु से) द्वारा होता है। यह संक्रमण ज्यादातर मनुष्यो में ही होता है, लेकिन कहीं कहीं कुत्तों में भी पाया गया है। कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल की भाषा में आँख आना कहते हैं। इसकी वजह से आँखें लाल, सूजन युक्त, चिपचिपी [कीचड़युक्त] होने के साथ-साथ उसमें बाल जैसी चुभने की समस्याएं हो सकती हैं।

  1. आंख आने का घरेलू उपाय है ठंडे और गर्म पानी के बैग – Aankh aane ke upay hai cold or warm compress
  2. आंख आने की समस्या को दूर करें बोरिक एसिड से – Aankh aane ki samasya ko dur kare boric acid se
  3. आँख आने पर उपाय करें गेंदा से – Aankh aane ka upay kare calendula se
  4. आँख आने पर करे काली चाय का उपयोग – Conjunctivitis ka gharelu upay hai black tea
  5. आंख आने से बचने का उपाय है नमक का पानी – Pink eye ka upay hai saline solution
  6. आंख आने से बचने का तरीका आईब्राइट – Aankh aane par chutkara dilta hai ryebright
  7. आंख आने से छुटकारा है सेब का सिरका – Aankh aane ka gharelu nuskha hai Apple vinegar
  8. आँख आने का देशी उपाय है एलो वेरा जेल – Aankh aane ki pareshani se bachata hai aloe vera gel
  9. आंख आने की परेशानी से बचने का उपाय है ब्रेस्ट मिल्क – Aankh aane ka deshi upay hai breast milk
  10. आँख आने का घरेलू नुस्खा करें दूध और शहद से – Aankh aane ka gharelu nuskha kare milk and honey se

कंजंक्टिवाइटिस आमतौर पर तीन प्रकार की होती है:

  • बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस – दोनों आँखों से बहुत अधिक कीचड़ आना।  आँखों से गाढ़ा पदार्थ निकलता रहता है। इसकी वजह से कई बार सोकर उठने पर पलकें एक साथ चिपक जाती हैं। इसमें डॉक्टरी सलाह से एंटीबायोटिक ड्रॉप्स या ऑइंटमेंट का इस्तेमाल करें।
  • वायरल कंजंक्टिवाइटिस – कीचड़युक्त पानी काम आना, एक आँख से पानी आना। आमतौर पर यह इन्फेक्शन पहले एक आँख में होता है, मगर आसानी से दूसरी आँख में भी फैल सकता है। गुनगुने या फिर नमक मिले पानी अथवा बोरिक एसिड पाउडर से दिन में कई बार आँखों को धोएं। डॉक्टरी सलाह लें।
  • एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस- दोनों आँखों से पानी आना, खुजली होना और लाली आना।  यह आमतौर पर दोनों आँखों को प्रभावित करता है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस में बताए उपायों पर अमल करें।

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस: इसमें बाकी लक्षणों के अलावाConjunctivitis, नेत्र शोथ, आँख आना घरेलू उपचार

लक्षण

आँखों का सफेद भाग लाल हो जाना
आँखों में खुजली होना
आँख से पानी जैसा तरल पदार्थ निकलना

सावधानी

बैक्टीरियल और वायरल कंजंक्टिवाइटिस बहुत तेजी से फैलने वाला रोग है।  यह परिवार और डॉक्टर की क्लिनिक में आए लोगों में बहुत तेजी से फैल सकता है। यदि आप या आपका बच्चा “आई इंफेक्शन” का शिकार हो गया है, तो परिवार के सभी सदस्य साफ सफाई पर खास तवज्जों दें। अच्छी तरह हाथ धोएं, रोगी के टॉवेल, रूमाल का इस्तेमाल न करें और तकिए का कवर रोजाना बदलें। धैर्य रखें, डॉक्टर के बताएं निर्देशों का पालन करें, कुछ दिनों में कंजंक्टिवाइटिस ठीक हो जाती है।

वायरल कंजंक्टिवाइटिस का कोई इलाज नहीं किया जाता है क्योंकि आमतौर पर एक हफ्ते में यह अपने आप ठीक हो जाता है। इसमें बोरिक एसिड से आँखों को धोना ठीक रहता है। एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस में नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इन्फ्लेमेट्री मेडिकेशन की जरूरत होती है और बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस में बैक्टीरियल आई ड्रॉप इस्तेमाल करने को कहा जाता है।

आँख आना घरेलू उपचार

Conjunctivitis, नेत्र शोथ, आँख आना घरेलू उपचार

आँख आना घरेलू उपचार

1. शहद :

1 ग्राम पिसे हुए नमक को शहद में मिलाकर आंखों में सुबह-शाम लगाने से आंख आने की बीमारी में आराम मिलता है।
चंद्रोदय वर्ति (बत्ती) को पीसकर शहद के साथ आंखों में लगाने से आंखों के रोग दूर होते हैं।

सोना मक्खी को पीसकर और शहद में मिलाकर आँख में सुबह-शाम लगाने से आंख आने के रोग में लाभ होता है।

2. जायफल : जायफल को पीसकर दूध में मिलाकर आंखों में सुबह-शाम लगाने से बीमारी में राहत मिलती है।

3. हल्दी : 10 ग्राम हल्दी को लगभग 200 मिलीलीटर पानी में उबालकर छान लें, इसे आँख में बार-बार बूंदों की तरह डालने से आंखों का दर्द कम होता है। इससे आंखों में कीचड़ आना और आँख का लाल होना आदि रोग समाप्त हो जाते हैं। इसके काढे़ में पीले रंग से रंगे हुए कपड़े का प्रयोग जब आंख आये तब करें। उस समय इस कपडे़ से आंखों को साफ करने से फायदा होता है।

हल्दी को अरहर की दाल में पकायें और छाया में सुखा लें उसे पानी में घिसकर, शाम होने से पहले ही दिन में 2 बार आंखों में जरूर लगायें। इससे झामर रोग, सफेद फूली और आंखों की लालिमा में लाभ होता है।

4. मुलहठी :

मुलहठी को पानी में डालकर रख दें। 2 घंटे के बाद उस पानी में रूई डुबोकर पलकों पर रखें। इससे आँख की जलन और दर्द दूर हो जाता है।
आंख आने पर या आंखों के लाल होने के साथ पलकों में सूजन आने पर मुलहठी, रसौत और फिटकरी को एक साथ भूनकर आंखों पर लेप करने से बहुत आराम आता है।

5. धनिया : धनिये का काढ़ा तैयार करके अच्छी तरह से छान लें। अब इस काढ़े को बूंद-बूंद करके हर 2-3 घंटों में आंखों में डालें। इससे आंखों को आराम मिलता है। इस काढ़े को आंखों में डालने की शुरुआत करने से पहले आंखों में एक बूंद एरण्ड तेल (कैस्टर आयल) डाल लें। यह आंख आने और आंखों के दर्द की बहुत लाभकारी दवा है।

6. सत्यानाशी :

सत्यानाशी (पीले धतूरे) का दूध, गोघृत (गाय के घी) के साथ आँख में लगाने से लाभ होता है। यह दूध हर समय नहीं मिलता इसलिए जब यह दूध मिले तो तब इस दूध को इकट्ठा करके सुखाकर रख लें। इसके बाद जरूरत पड़ने पर इसे गोघृत (गाय के घी) में मिलाकर काजल की तरह आंखों में लगाने से आंख आने का रोग दूर होता है।
सत्यानाशी (पीला धतूरा) का दूध निकालकर किसी सलाई की मदद से आँख में लगाने से आंखों की सूजन और दर्द दूर होता है।

7. ममीरा : ममीरा को पीसकर पलकों पर लगाने से आँख के सभी रोगों में लाभ होता है।

8. अर्कपुष्पी : आंख आने में अर्कपुष्पी (छरिवेल) की जड़ को पीसकर पलकों पर लेप करने से आंखों के रोगों में आराम मिलता है।

9. पाथरचूर :

पाथरचूर (पाषाण भेद की एक जाति पाथरचूर से अलग) का रस पलकों पर लगाने से आंखों से पानी बहने के समय का दर्द कम होता है।
पाथरचूर (सिलफड़ा) को पीसकर शहद में मिलाकर आंखों में लगाने से पूरा आराम मिलता है।

10. रसौत :

रसौत को पानी में घोलकर आँख की पलकों पर लगाने से काफी लाभ होता है। नेत्राभिष्यन्द या आंख आने का रोग नया हो या पुराना इससे जरूर लाभ होगा। रसौत के घोल में अफीम, सेंधानमक और फिटकरी को मिलाकर भी लेप किया जा सकता है।
रसौत को घिसकर रात को सोते समय आंखों की पलकों पर लेप करने से लाभ होता है।

11. बेल : नेत्राभिष्यन्द या आंख आने पर लगभग 7 मिलीलीटर की मात्रा में बेल के पत्तों के रस को रोगी को सुबह-शाम पिलायें और उसके पत्तों का लेप बनाकर पलकों पर लगायें। इससे आंखों को आराम मिलता है।

12. सुहागा : आंख आने पर सुहागा और फिटकरी को एक साथ पानी में घोल बनाकर आंख को धोयें और बीच-बीच में बूंद-बूंद (आई ड्राप्स) की तरह प्रयोग करें। इससे बहुत जल्दी लाभ होता है।

13. बकरी का दूध : आंखों के लाल होने पर मोथा या नागरमोथा के फल को साफ करके बकरी के दूध में घिसकर आंखों में लगाने से आराम आता है।

14. चाकसू : नेत्राभिष्यन्द या आंख आने पर चाकसू के बीजों को गूंथे हुए आटे के अंदर रखकर गर्म राख में रख दें और बाद में निकालकर बीज के छिलके हटाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 60 मिलीग्राम की मात्रा में आंखों में लगाने से पूययुक्त नेत्राभिष्यन्द या आंख आना ठीक हो जाता है।

15. फरहद :

आंख आने में फरहद की छाल को बारीक पीसकर पाउडर के रूप में पलकों पर लगाने से पूरा आराम मिलता है।
फरहद की खाल के अंदर के भाग पर घी लगाकर घी के दिये को जलाकर जमी राख को आंखों में काजल की तरह लगाने से आँख के रोग दूर होते हैं। स्वस्थ आंखों में लगाने से आंखों में किसी भी प्रकार के रोग होने की संभावना ही नहीं रहती है।

16. वेदमुश्क के फूल : वेदमुश्क के फूलों के रस में कपड़ा भिगोकर आंखों पर रखने से नेत्राभिष्यन्द या आंख आना में लाभ होता है।

17. हरिद्रा : नेत्राभिष्यन्द (आंख आने) में घीकुआंर का रस और हरिद्रा अथवा एलुवा (मुसब्बर) और हरिद्रा मिलाकर पलकों पर लेप करने से लाभ होता है।

18. रक्त पुनर्नवा की जड़ : गदहपुरैना की जड़ (रक्त पुनर्नवा की जड़) को पीसकर शहद में मिलाकर रोजाना 2 से 3 बार आँख में लगायें। इससे नेत्राभिष्यन्द (आंख आने) के रोग में आराम आता है।

19. अनन्तमूल : अनन्तमूल का दूध आंखों में डालने से नेत्राभिष्यन्द या आँख आना में लाभ होता है।

20. गुलाबजल :

आंखों को साफ करके गुलाब जल की बूंदें आंखों में डालने से आंखों के रोग समाप्त हो जाते हैं।
गुलाबजल आंखों में डालने से आंखों की जलन और किरकिरापन (आंखों में कुछ चुभना) भी दूर हो जाता है।

21. चमेली : नेत्राभिष्यन्द (आंख आने) पर कदम के रस में चमेली के फूलों को पीसकर पलकों पर लेप करने से रोगी को लाभ होता है।

22. अगस्त के फूल : अगस्त के फूल और पत्तों का रस नाक में डालने से आँख में आराम आता है।

23. बेर : बेर की गुठली को पीसकर गर्म पानी से अच्छी तरह से छानकर आँख में डालने से नेत्राभिष्यन्द और आंखों का दर्द ठीक हो जाता है।

24. निर्मली के बीज : निर्मली के बीजों को पानी के साथ पीसकर आंखों में लगाने से आँख का लाल होना और नेत्राभिष्यन्द ठीक हो जाता है।

25. कुंगकु : 20 से 40 मिलीलीटर कुंगकु की छाल का काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से आंखों के कई रोगों में फायदा होता है।

26. बबूल : बबूल की पत्तियों को पीसकर टिकिया बना लें और रात के समय आंखों पर बांध लें सुबह उठने पर खोल लें। इससे आंखों का लाल होना और आंखों का दर्द आदि रोग दूर हो जायेंगे।

27. मक्खन : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में स्वर्ण बसन्त मालती सुबह-शाम मक्खन-मिश्री के साथ सेवन करने से आंख आना, आंखों में कीचड़ जमना और आंखों की रोशनी कमजोर होना आदि रोग दूर होते हैं।

28. बोरिक एसिड पाउडर : बोरिक एसिड पाउडर को पानी में मिलाकर आंखों को कई बार साफ करने से आंखों के अंदर की पूय (मवाद) और धूल मिट्टी साफ हो जाती है।

29. मिश्री : लगभग 6 से 10 ग्राम महात्रिफला और मिश्री को घी में मिलाकर सुबह-शाम रोगी को देने से गर्मी के कारण आँख में जलन, आंखें ज्यादा लाल हो जाना, आँख की पलकों का सूज जाना और रोशनी की ओर देखने से आँख में जलन होना आदि रोग दूर होते हैं। इसके साथ ही त्रिफला के पानी से आंखों को धोने से भी आराम आता है।

30. फिटकरी : फिटकरी का टुकड़ा पानी में डुबोकर पानी की बूंदें आँख में रोजाना 3 से 4 बार लगाने से लाभ मिलता है।

31. त्रिफला : 4 चम्मच त्रिफला का चूर्ण 1 गिलास पानी में भिगों दें। फिर उस पानी को अच्छी तरह से छानकर आंखों पर छींटे मारकर आंखों को दिन में 4 बार धोने से आंखों के रोगों में लाभ होता है।

32. बरगद : बरगद का दूध पैरों के नाखूनों में लगाने से आंख आना ठीक होता है।

33. दूध : मां के दूध की 1-2 बूंदे बच्चे की आँख में डालने से आंखों के रोगों में लाभ होता है।

34. आंवला : आंवले का रस निकालकर उसे किसी कपडे़ में छानकर रख लें। इस रस को बूंद-बूंद करके आंखों में डालने से आंखों का लाल होना और आंखों की जलन दूर होती है।

35. गोक्षुर : गोक्षुर के हरे ताजे पत्तों को पीसकर पलकों पर बांधने से आँख की सूजन और आंखों की लाली दूर होती है।

36. दूब : हरी दूब (घास) के रस में रूई के टुकड़े को भिगोकर पलकों पर रखने से आंख आना के रोग से छुटकारा मिलता है।

37. हरड़ : हरड़ को रात के समय पानी में डालकर रखें। सुबह उस पानी को कपड़े से छानकर आँख को धोयें। इससे आंखों का लाल होना दूर होता है।

38. नीम :

नीम के पत्ते और मकोय का रस निकालकर पलकों पर लगाने से आंखों का लाल होना दूर होता है।
नीम के पानी से आंखें धोकर आंखों में गुलाबजल या फिटकरी का पानी डालें।

39. अडूसा : अड़ूसा के ताजे फूलों को हल्का सा गर्म करके पलकों पर बांधने से आँख के दर्द होने की बीमारी दूर होती है।

40. तगर : तगर के पत्तों को पीसकर आंखों के बाहरी हिस्सों में लेप करने से आंखों का दर्द बन्द हो जाता है।

41. बथुआ : आँख की सूजन होने पर रोज बथुए की सब्जी खाने से लाभ होता है।

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