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Akalber ke fayde | अकलबेर के फायदे

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अकलबेर Akalber

इसे अन्य भाषाओं में भंगजल, द्रींनखारी, सिदासु, कालबीर, वज्रबल आदि नामो से जाना जाता है। ये एक झाड़ी नुमा पौधा होता है जो कि हिमालय और सिंध के क्षेत्रो में पायाi जाता है। अकलबेर सीधी और कठोर डालियों वाली होती है। इसकी शाखाएं लम्बी और फूलमय होती है और पत्तो के किनारे कटे हुए रहते है। इसपर दो इंच लम्बे एवं डेढ़ इंच व्यास में पीले फूल लगते है और इसके बीज अत्यंत बारीक होते है।

अकलबेर के फायदे Akalber ke fayde

सर्दी, खांसी और जुकाम

अकलबेर के चूर्ण को 2 ग्राम की मात्रा में शहद या मिश्री के साथ देने से सर्दी, खांसी, जुकाम में राहत मिलता है।

ज्वर या बुखार

2 से 8 ग्राम की मात्रा में इसके चूर्ण को लेकर इसमें मिश्री पीसकर मिला ले इसे शुद्ध पानी के साथ लेने से ज्वर का नाश होता है।

मूर्छा या बेहोशी

इसके पत्तो एवं छाल के काढ़े बनाकर व्यक्ति को पिलाने से मूर्छा और बेहोशी दूर होती है।

दांत के दर्द

रुई के फोहे में अकलबेर के चूर्ण को रखकर दांत के दर्द के स्थान पर दबाकर रखने से बहुत आराम मिलता है।

सिरदर्द

कालबीर के जड़ और पत्तो को पीसकर सिर पर सूती कपडे से बांधने से सिरदर्द में बहुत आराम मिलता है।

गठिया रोग

इसके पत्तो और छाल के काढ़े बनाकर पिलाने से और इसकी जड़ को पीसकर दर्द के स्थान पर बांधने से गठिया रोग में लाभ मिलता है।

अकलबेर का स्वाद कड़वा होता है। इसमें ग्लूकोसाइड पाया जाता है।

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