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Chai pine ke fayde aur nuksan चाय पीने के फायदे और नुकसान

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Chai चाय को अंग्रेजी में टी Tea कहते है। शोधकर्ताओं के अनुसार ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों के गुण और लाभ समान होते है। देखा जाये तो पानी की तुलना में चाय पीना अच्छा है। क्योकि ये न केवल तरल पदार्थो की पूर्ति करती है, बल्कि ये एंटी-ऑक्सीडेंट भी देती है। इससे सेंट्रल नर्वस सिस्टम उत्तेजित होता है जिससे व्यक्ति चिंतामुक्त हो जाता है। चाय में मौजूद फ्लोराइड दांतो के लिए अच्छी होती है। ये हमारे दांतो को ख़राब होने से बचाते है और मजबूती प्रदान करते है।
Chai, शक्कर और दूध आवश्यक मात्रा में लेकर खूब पकाकर, छानकर पीये। इस चाय की बनाने की विधि से अत्यधिक नुकसान होता है।

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चाय बनाने की विधि Chai banane ki vidhi

1- सबसे पहले एक साफ़ बर्तन में पानी, दूध और शक्कर पर्याप्त मात्रा में लेकर उबाले। जब ये उबलने लगे तो इसे नीचे उतार ले। इसमें पर्याप्त में चाय डालकर दस मिनट्स तक ढक कर रखे। फिर इसे छानकर कुछ खाने के बाद पिए। ऐसे Chai से हानि या नुकसान नहीं होती है।
Chai को अधिक स्वादिष्ट बनाना है। तो इसके लिए इसमें अदरख, काली मिर्च, सोंठ, पुदीना या तुलसी के पत्ते इस्तेमाल कर सकते है। जिससे हमारा स्वास्थ भी ठीक रहता है और चाय स्वादिष्ट बनता है।
2- इसमें सबसे पहले शक्कर और पानी को खूब उबाल कर चायपत्ती डालकर नीचे उतार ले। इसे छानकर फिर इसमें दूध मिलाये, चाय तैयार है। इसको पीने से ये नुकसान नहीं करती है।

चाय पीने के फायदे Chai pine ke fayde

जड़ी-बूटी की चाय

इसे अंग्रेजी में हर्बल टी भी कहते है। ये कैफीन रहित चाय है जो तनाव में पीने से बहुत लाभ मिलता है।

-इसमें अदरख, सोंठ, पुदीना, अश्वगंधा, जीरा, इलाइची, लौंग आदि। इन सब चीजों को चाय में प्रयोग करने से हमारे लिए स्वास्थवर्धक होती है। ये Chai पीने से मन में प्रसन्नता बनी रहती है।

नीबू की चाय

सर्दी, जुकाम हो जाने से नीबू के चाय ज्यादा फायदा करती है। नीबू का रस निकालकर एक बर्तन में रख दे। इसमें चाय का पानी डाल के आठ मिनट्स तक ढक दे। फिर इसमें दूध और चीनी मिलाकर थोड़ा गर्म करे। नीबू के चाय तैयार है।

मुलहठी

ये शक्कर से कई गुना मीठा होता है। मुलहठी गंजापन, शरीर की दुर्गन्ध, पुरानी थकान, हृदय में जलन। छाले, कफ, मसूढ़ों में सूजन, दांतो में दर्द आदि बीमारियों में लाभदायक होता है।
-इसे आवश्यकतानुसार चाय में डालकर पीने से बहुत लाभ मिलता है।

धूप से बचाव में उपयोगी चाय

इसमें टैनिन पाया जाता है। यह सूर्य की अल्ट्रा-वायलेट किरणों को सोख लेता है। Chai की पत्तियों को सादे शुद्ध पानी में उबालकर चेहरा धुले। ये सनस्क्रीन लोशन जैसा काम करता है। इससे चेहरे पर सूर्य की किरणों का प्रभाव नहीं दिखता है।

तनाव

सामान्य और निर्धारित मात्रा में चाय पीने से तनाव दूर होता है। तनाव को दूर करने के लिए एक कप चाय या काफी को पीने से मस्तिष्क को आराम मिलता है।

आंतो में संक्रमण रोकना और गुर्दे की सफाई

चाय मलत्याग करने में सहायक होता है। ये आंतो में होने वाले संक्रमण को रोकता है। इससे गुर्दे की सफाई में भी बहुत उपयोगी माना जाता है।
-दो कप पानी में एक चम्मच Chai की पत्ती डालकर उबाले। जब एक कप पानी बचे तो इसे छान ले। इसमें थोड़ा ठंडा पानी मिलाकर सुबह खाली पेट पिए। चाय पीने के कम से कम एक घंटे तक कुछ न खाये-पिए।
-काली चाय यानी बिना दूध के Chai बनाकर पीये। ये गुर्दे को साफ़ रखने में काफी मदद करता है। महीने में कम से कम सात दिन लगातार ऐसी चाय पीने से गुर्दे से सम्बंधित कोई भी समस्या नहीं आती है।

गर्भावस्था में दर्द

बताये गए विधि से बनाये हुए चाय में केसर डालकर पीने से प्रसव पीड़ा कम होती है। बच्चे का जन्म आसानी से हो जाता है।

सर्दी जुकाम बुखार

यदि सर्दी जुकाम होने के बाद बुखार भी हो गया हो। और साथ में खांसी भी आ रही हो। तो इसमें चाय पीना लाभदायक रहता है। इसमें सर्दी को दूर करके पसीना आता है। बुखार में भी आराम मिलता है। कफ वाली खांसी, पीला या बदबूदार कफ, सिरदर्द, विवर प्रदाह आदि। इसमें चाय पीना हानिकारक है।

बवासीर

इसमें दर्द और जलन बहुत होता है। ये दो प्रकार के होते है अंदरूनी बवासीर और बाहरी बवासीर। जलन और दर्द दूर करने के लिए चाय बहुत उपयोगी होता है।
-चाय की पत्ती को पीसकर गर्म कर ले। फिर गर्म पिसी हुई चाय बवासीर पर लेप करे। इससे जलन और दर्द दूर होता है।

पेचिश

इसमें मलत्याग करने पर रक्त आने साथ में रक्त आता है। पेचिस में Chai बहुत लाभकारी होता है।
चाय में पॉलीफिनोल नामक तत्व पाया जाता है। जिससे पेचिश के कीटाणु नष्ट हो जाते है। और पेचिस में आराम मिलता है।

बालो में चमक

इसके पानी से बाल धोने पर बालो का गिरना बंद हो जाता है और बालो में चमक आती है। रसायन युक्त शैम्पू के इस्तेमाल से रुसी का होने के बजाय बढ़ जाता है। इसलिए चाय का उपयोग करे।
चाय पत्ती को उबालकर उसके पानी को छानकर फ्रिज में रख ले। बालो को धोने के बाद इस पानी को बालो में कंडीशनर की तरह लगाए। इससे बालो की चमक बढ़ेगी।

दस्त या पेट में मरोड़

उल्टा-सीधा खाने से या स्टमक में संक्रमण से पेट में मरोड़ और दस्त होने लगते है।
-1/4 चम्मच नमक में एक चम्मच चायपत्ती ले। दोनों को पीसकर इसको तीन भाग करके दिन में तीन बार गर्म पानी के साथ ले। ऐसा करने से मरोड़ और दस्त दोनों बंद हो जाते है।

कोलेस्ट्राल को कम करने में चाय लाभदायक

चाय पीने से कोलेस्ट्राल कम होता है। जिससे ह्रदय रोग होने का खतरा कम हो जाता है।

सूजन

इसमें चाय का बहुत महत्वपूर्ण लाभ है। इसे पानी में उबालकर ठंडा कर ले। इस पानी को सूती कपडे लेकर सेंके। इससे सूजन ख़त्म हो जाती है।

चाय पीने के नुकसान

  • नशीली दवाओं का सेवन करने वाले और अनिद्रा रोगी के लिए Chai हानिकारक है। ये रोगी चाय पिएंगे तो नींद कम आएगी और अधिक गंभीर परिणाम हो सकते है। चाय अम्लपित्त के लिए हानिकारक होती है।
  • अधिक चाय का सेवन करने से हड्डियों व जोड़ो में दर्द हो सकते है। दांतो का पीलापन, अवसाद, तनाव आदि बीमारिया हो सकती है। W.H.O. के अनुसार 1.5 पीपीएम फ्लोराइड ही उचित है। लेकिन चाय एक कप में 18.13 पीपीएम फ्लोराइड होती है। फ्लोराइड के ज्यादा सेवन से जोड़ो में दर्द, कमजोरी आदि की शिकायत हो सकती है।
  • इसके अधिक सेवन करने से भूख लगना बंद हो जाती है। क्योकि चाय को ज्यादा उबालने से उसमे टैनिन नामक रसायन निकलता है। जो पेट के भीतरी दीवार पर जमा हो जाता है। जिससे भूख में कमी आती है।
  • वात रोगियों को चाय का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। चाय यूरिक अम्ल अधिक बढ़ाती है। जिससे गठिया, जोड़ो में सूजन और दर्द बढ़ जाती है। इसलिए वात रोगियों को चाय का कम सेवन करना चाहिए।

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