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चक्रासन शरीर की सुंदरता को बढ़ाता है, और कई प्रकार के रोगों से बचाव भी करता है

चक्रासन शरीर की सुंदरता को बढ़ाता है
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chakrasana steps benefits in hindi:  योग करने से शरीर स्वस्थ और निरोगी रहता है। इसलिए नियमित रूप से अपने दिनचर्या में योगासन को शामिल करना चाहिए। आज आपको ऐसे योग के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे करने से आपका शरीर सुंदर और सुडोल बनता है। चक्रासन शरीर की सुंदरता को बढ़ाता है, और कई प्रकार के रोगों से बचाव भी करता है। चक्र का मतलब होता है, गोलाकार या पहिया। चक्रासन करते समय शरीर की आकृति चक्र की भांति प्रतीत होती है, इसलिए इसको चक्रासन कहते हैं। इसको उर्ध्व धनुरासन भी कहा जाता है, क्योंकि यह धनुरासन के बिल्कुल उल्टा होता है। योग शास्त्र में चक्रासन को मणिपूरक चक्र भी कहते हैं।

Chakrasana {Wheel Pose}-Steps And Benefits in hindi

  1. ऊर्ध्व धनुरासन (चक्रासन) के फायदे – Urdhva Dhanurasana (Chakrasana) ke fayde
  2. ऊर्ध्व धनुरासन (चक्रासन) करने से पहले यह आसन करें – Urdhva Dhanurasana (Chakrasana) karne se pehle yeh aasan kare
  3. ऊर्ध्व धनुरासन (चक्रासन) करने का तरीका – Urdhva Dhanurasana (Chakrasana) karne ka tarika
  4. ऊर्ध्व धनुरासन (चक्रासन) का आसान तरीका – Urdhva Dhanurasana (Chakrasana) ka aasan tarika
  5. ऊर्ध्व धनुरासन (चक्रासन) करने में क्या सावधानी बरती जाए – Urdhva Dhanurasana (Chakrasana) karne me kya savdhani barti jaye
  6. ऊर्ध्व धनुरासन (चक्रासन) करने के बाद आसन – Urdhva Dhanurasana (Chakrasana) karne ke baad aasan
  7. ऊर्ध्व धनुरासन (चक्रासन) का वीडियो – Urdhva Dhanurasana (Chakrasana) ka video

चक्रासन कैसे करें आइए जानते हैं इसकी विधि

चक्रासन शरीर की सुंदरता को बढ़ाता है

chakrasana

  1. सबसे पहले साफ़ और सपाट भूमि पर चटाई या कपड़े का आसन बिछा ले।
  2. अब जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और शवासन की मुद्रा में शरीर को रखे यानी बिल्कुल निर्जीव बन जाए।
  3. फिर दोनों पैरों के बीच लगभग एक डेढ़ फीट का की दूरी बनाए और जमीन से पैरों के तलवों और एड़ियों को लगाएं।
  4. अब दोनों हाथो की कोहनियो को मोड़कर, हाथो को जमीन पर कान के पास इस प्रकार लगाएं कि उंगलियाँ कंधों की ओर तथा हथेलिया समतल जमीन पर टिक जाये।
  5. अब शरीर को हल्का ढीला छोड़े और गहरी साँस लें।
  6. पैरों और हाथो को सीधा करते हुए, कमर, पीठ तथा छाती को ऊपर की ओर उठाएं। सिर को कमर की ओर ले जाने का प्रयास करें तथा शरीर को ऊपर करते समय साँस रोककर रखे।
  7. अंतिम स्थिति में पीठ को सुविधानुसार पहिये का आकर देने की कोशिश करें।
    शुरुवात में इस आसन को 15 सेकंड तक करने का प्रयत्न करें। अभ्यास अच्छे से हो जाने पर 2 मिनट तक करे।
  8. कुछ समय पश्चात् शवासन की अवस्था में लोट आएं।

यह आसन समान्य आसनों से थोड़ा कठिन होता है इसलिए इस आसन को योगाचार्य की उपस्थिति में करें। प्रतिदिन धीरे धीरे अभ्यास करते रहेंगे तो आप भी इसे आसानी से कर पाएंगे लेकिन प्रारंभिक दौर में भी शरीर पर अत्यधिक दबाव डालें।

यह योग जितना कठिन है उतना ही शरीर के लिए लाभप्रद भी है। आइये जानते है

चक्रासन के लाभ-

चक्रासन योग विधि, लाभ और सावधानी

चक्रासन योग विधि, लाभ और सावधानी

  1. यह आसन करने रक्त का प्रवाह तेजी से होता है।
  2. मेरुदंड तथा शरीर की समस्त नाड़ियों का शुद्धिकरण होकर योगिक चक्र जाग्रत होते है।
  3. छाती, कमर और पीठ पतली और लचीली होती है साथ ही रीड़ की हड्डी और फेफड़ों में लचीलापन आता है।
  4. मांसपेशियों मजबूत होती है जिसके कारण हाथ, पैर और कंधे चुस्त दुरुस्त होते है।
  5. इस आसन के करने से लकवा, शारीरिक थकान, सिरदर्द, कमर दर्द तथा आंतरिक अंगों में होने वाले दर्द से मुक्ति मिलती है।
  6. पाचन शक्ति बड़ती है। पेट की अनावश्चयक चर्बी काम होती है और शरीर की लम्बाई बढ़ती है।
  7. इस आसन को नियमित करने से वृद्धावस्था में कमर झुकती नहीं है और शारीरिक स्फूर्ति बनी रहती है साथ ही स्वप्नदोष की समस्या से भी मुक्ति मिलती है।

चक्रासन को करते समय सावधानियाँ

योग करने से लाभ तब होता है जब हम उन्हें सही तरीके और सही अवस्था में करें। थोड़ी सी गलती हमारे शरीर के लिए बहुत ही नुकसानदेह हो सकती है। आइये जानते है चक्रासन को करते समय किन-किन सावधानियों को रखना चाहिए-

  1. महिलाओ को गर्भावस्था और मासिक धर्म के समय यह आसन नहीं चाहिए।
  2. दिल के मरीज, कमर और गर्दन दर्द के रोगी, हाई ब्लड प्रेशर और किसी भी तरह के ऑपरेशन वाले लोगो को भी यह आसान नहीं करना चाहिए।
  3. योगाचार्य की उपस्थिति में ही इस Chakrasana का अभ्यास करें।

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