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Dalchini ke fayde aur nuksan

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इसे अन्य भाषाओं में दारचीनी, कलमी दारचीनी, रज, किरका आदि नामो से जाना जाता है। दालचीनी हिमालय, सीलोन और मलाया प्रायद्वीप में पैदा की जाती है। इसका वृक्ष न ज्यादा बड़ा होता है और न ज्यादा छोटा।

इसके वृक्ष हरा-भरा, छाल मोटी, फिसलनी और फीके रंग की होती है। इसके पत्ते 7.5 सेमी से 20 सेमी तक चौड़े होते है। लंबगोल और बरछी के आकर के होते है। इसका फल डेढ़ से दो सेमी तक लम्बा और गहरे बैगनी रंग का होता है। दालचीनी के नाम से बाजारों में चार भिन्न-भिन्न वृक्षों के छाल बेचे जाते है।

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दालचीनी के आयुर्वेदिक गुण Dalchini ke ayurvedic gun

इसकी छाल कड़वी, तीक्ष्ण और खुशबु में सुगन्धित रहती है। ये कामोद्दीपक, कृमिनाशक, पौष्टिक, वात, पित्त, प्यास, गले का सूखना, अतिसार, खुजली, ह्रदय तथा गुदा द्वार की बीमारियों में लाभदायक है। इसका तेल रक्तस्रावरोधक, पेट के कब्ज को दूर करने वाला, अरुचि और दस्तो के रोग में लाभदायक होते है।

दालचीनी के महत्वपूर्ण फायदे Dalchini ke mahatwpurn fayde

मुंह के छाले में प्रयोग

इसके पत्तो को पीसकर काढ़ा बनाकर उससे सुबह शाम लगातार 4 से 5 दिन तक कुल्ला करने से मुंह के छाले ख़त्म हो जाते है।

कब्ज में  उपयोग

आजकल के जीवन में खान-पान सही न हो पाने की वजह से कब्ज बनना आम बात हो गई है। इसलिए कब्ज को दूर करने के लिए इसके पत्तो को पीसकर चूर्ण बना ले और इसके थोड़े से पानी के साथ फंकी लेने से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है।

दस्त में लाभ

40 ग्राम दालचीनी के छाल लेकर उसमे 10 ग्राम कत्था मिलाकर पीस ले। इसमें 250 मिली खौलता पानी डालकर ढँक देना चाहिए। करीब दो घंटे के बाद इसे छानकर दो हिस्सों में करके सुबह शाम पी ले इससे दस्त में आराम मिलता है।

दस ग्राम कत्था और दस ग्राम दालचीनी का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना ले इसे लेने से दस्त बंद हो जाते है।

भूख बढ़ाने में  Dalchini

सोंठ दस ग्राम, dalchini दस ग्राम और इलाइची दस ग्राम। इन तीनो को पीसकर चूर्ण बना ले और भोजन के पहले लेने से भूख में बढ़ोत्तरी होती है।

खांसी में  लाभ

इसके चूर्ण को 5 ग्राम, सौंफ 3 ग्राम, मुलेठी 3 ग्राम, बीज निकाले हुए मुनक्का दाख 6 ग्राम, मीठा बादाम का मगज 10 ग्राम, कड़वी बादाम के मगज 6 ग्राम, शक्कर 6 ग्राम। इन सब चीजों को लेकर पीसकर चार-चार ग्राम की गोलियां बना ले। इन गोलियों को दिन भर मुंह में चूसते रहने से खांसी ख़त्म हो जाती है।

सिरदर्द में दालचीनी के फायदे

किरका के तेल को ललाट पर मलने से सर्दी की वजह से पैदा हुआ सिरदर्द समाप्त हो जाता है।

दांत में दालचीनी के लाभ

इसके तेल को रुई के फोहे में लगाकर दांत के नीचे दबा लेने चाहिए जिससे दांत में दर्द या दांत में कीड़े में बहुत फायदा मिलता है।

कान के बहरेपन में दालचीनी का उपयोग

दालचीनी के तेल को कान में टपकाने से कान के बहरेपन में लाभ मिलता है और कान के दर्द भी दूर होते है।

दालचीनी रखे मधुमेह को नियंत्रित

टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में दालचीनी एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है।

दारचीनी चूर्ण को एक चम्मच के मात्रा में प्रतिदिन लेने से ये इन्सुलिन की प्रतिक्रिया बढाती है और रक्त में शर्करा की मात्रा कम करती है।

चाय में दालचीनी डालकर पीने के फायदे

इसके चाय के पीने से व्यक्ति के स्मरण शक्ति में प्रगति होता है और कार्यशीलता में सुधार होता है। इसके सेवन से किसी भी प्रकार की चिंता हो ये दूर करती है और मन शांत करके मन पसन्नित करता है।

 

दालचीनी के नुकसान Dalchini ke nuksan

  • इसके ज्यादा सेवन करने से शरीर में जहरीला प्रभाव छोड़ता है खासकर लिवर को ज्यादा नुकसान होता है।
  • गर्भवती महिलाओ को दालचीनी का उपयोग करने से पहले चिकित्सक से संपर्क कर लेना चाहिए।
  • कुछ लोंगो को दालचीनी के प्रयोग करने से एलर्जी होती है इससे दालचीनी का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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