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जटामांसी के फायदे और नुकसान

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जटामांसी को बालछड़, स्पाइक नाड व अन्य नामों से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से हिमालय में पाई जाती है। इसकी जड़ में बाल जैसे तन्तु होने के कारण इसे जटामांसी कहा जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि से जटामांसी कई औषधीय गुणों से भरपूर है, जो इम्यून सिस्टम, दिल, रक्तचाप आदि बीमारियों से बचाता है। यह दिल की धड़कन को संतुलित रखने में भी लाभकारी होती है।

हिमालय में उगने वाली जटामांसी औषधीय जड़ी- बूटी का इस्तेमाल तीक्ष्ण गंध वाला इत्र बनाने के लिए भी किया जाता है। इसका उपयोग मस्तिष्क और नाड़ियों संबंधी रोगों के उपचार में भी किया जाता है। मस्तिष्क या सिर से जुड़ी समस्याओं के लिए जटामांसी औषधि एक रामबाण इलाज है।

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Jatamansi ke Fayde जटामांसी के फायदे

  1. अनिद्रा : ये धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है। अनिद्रा की समस्या होने पर सोने से एक घंटा पहले एक चम्मच जटामांसी की जड़ का चूर्ण ताजे पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
  2. बाल काले और लंबे करना : जटामांसी के काढ़े से अपने बालों की मालिश कर सुबह-सुबह रोज लगायें और 2 घंटे के बाद नहा लें इसे रोज करने से फायदा पहुंचेगा।
  3. सूजन और दर्द : अगर आप सूजन और दर्द से परेशान हैं तो जटामांसी चूर्ण का लेप तैयार कर प्रभावित भाग पर लेप करें। ऐसा करने से दर्द और सूजन दोनों से राहत मिलेगी।
  4. बिस्तर पर पेशाब करना : जटामांसी और अश्वगंधा को बराबर मात्रा में लेकर पानी में डालकर काफी देर तक उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को छानकर बच्चे को 3 से 4 दिनों तक पिलाने से बिस्तर में पेशाब करने का रोग समाप्त हो जाता है।
  5. बेहोशी : जटामांसी को पीसकर आंखों पर लेप की तरह लगाने से बेहोशी दूर हो जाती है।
  6. दांतों का दर्द : यदि कोई व्यक्ति दांतों के दर्द से परेशान है तो, जटामांसी की जड़ का चूर्ण बनाकर मंजन करें। ऐसा करने से दांत के दर्द के साथ- साथ मसूढ़ों के दर्द, सूजन, दांतों से खून, मुंह से बदबू जैसी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।
  7. पेट में दर्द : जटामांसी और मिश्री एक समान मात्रा में लेकर उसका एक चौथाई भाग सौंफ, सौंठ और दालचीनी मिलाकर चूर्ण बनाएं और दिन में दो बार 4 से 5 ग्राम की मात्रा में रोजाना सेवन करें। ऐसा करने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
  8. निद्राचारित या नींद में चलना : लगभग 600 मिलीग्राम से 1.2 ग्राम जटामांसी का सेवन सुबह और शाम को सेवन करने से इस रोग में बहुत लाभ मिलता है।
  9. तेज दिमाग : जटामांसी दिमाग के लिए एक रामबाण औषधि है, यह धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है। इसके अलावा यह याददाश्त को तेज करने की भी अचूक दवा है। एक चम्मच जटामांसी को एक कप दूध में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।
  10. रक्तचाप : जटामांसी औषधीय गुणों से भरी जड़ीबूटी है। एक चम्मच जटामांसी में शहद मिलाकर इसका सेवन करने से ब्लडप्रेशर को ठीक करके सामान्य स्तर पर लाया जा सकता है।
  11. हिस्टीरिया : जटामांसी चूर्ण को वाच चूर्ण और काले नमक के साथ मिलाकर दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से हिस्टीरिया, मिर्गी, पागलपन जैसी बीमारियों से राहत मिलती है।
  12. रक्तपित्त : जटामांसी का चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1.20 ग्राम नौसादर के साथ सुबह-शाम खाने से रक्तपित्त और खून की उल्टी ठीक होती है।
  13. ज्यादा पसीना आना : जटामांसी के बारीक चूर्ण से मालिश करने से ज्यादा पसीना आना कम हो जाता है।
  14. बवासीर : जटामांसी और हल्दी समान मात्रा में पीसकर प्रभावित हिस्से यानि मस्सों पर लेप करने से बवासीर की बीमारी खत्म हो जाती है। इसके अलावा जटामांसी का तेल मस्सों पर लगाने से मस्से सूख जाते हैं।
  15. मासिक धर्म में विकार : 20 ग्राम जटामांसी, 10 ग्राम जीरा और 5 ग्राम कालीमिर्च मिलाकर चूर्ण बनाएं। एक- एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करें। इससे मासिक धर्म के दौरान दर्द में आराम मिलता है।
  16. शरीर कांपना : यदि किसी व्यक्ति के हाथ- पैर या शरीर कांपता है तो उसे जटामांसी का काढ़ा बनाकर रोजाना सुबह शाम सेवन करना चाहिए या फिर जटामांसी के चूर्ण का दिन में तीन बार सेवन करना चाहिए। इससे शरीर कंपन की समस्या दूर हो जाती है।
  17. मुंह के छाले : जटामांसी के टुकड़े मुंह में रखकर चूसते रहने से मुंह की जलन एवं पीड़ा कम होती है।
  18. नपुंसकता : यदि कोई यक्ति नपुंसकता की गंभीर समस्या से परेशान है तो जटामांसी, जायफल, सोंठ और लौंग को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का रोजाना दिन में तीन बार सेवन करने से नपुंसकता से छुटकारा मिलता है।
  19. चेहरा साफ करना : जटामांसी की जड़ को गुलाबजल में पीसकर चेहरे पर लेप की तरह लगायें। इससे कुछ दिनों में ही चेहरा खिल उठेगा।
  20. सिर दर्द : अक्सर तनाव और थकान के कारण सिर दर्द की परेशानी हो जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए जटामांसी, तगर, देवदारू, सोंठ, कूठ आदि को समान मात्रा में पीसकर देशी घी में मिलाकर सिर पर लेप करें, सिर दर्द में लाभ होगा।

Jatamansi ke nuksan जटामांसी के नुकसान

-मासिक धर्म: महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान इसका ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल करने से समस्या हो सकती है.
-गर्भावस्था के दौरान: गर्भवती महिलाओं को जटामांसी के नुकसान से बचने के लिए इस दौरान जटामांसी के इस्तेमाल से बचना चाहिए. इसके साथ ही महिलाओं को स्तनपान कराने के दौरान भी जटामांसी का इस्तेमाल रोक देना चाहिए.
-ज्यादा इस्तेमाल से: सामान्य तौर पर भी अधिकतम इस्तेमाल से या इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से जटामांसी के नुकसान मसलन पेट दर्द की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.
-रक्तचाप में: जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या है उन्हें इसके इस्तेमाल से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेना चाहिए. ऐसा नहीं करने से आपको एलर्जी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
-अनावश्यक इस्तेमाल से: अनावश्यक रूप से जटामांसी का ज्यादा इस्तेमाल करने पर आपको उल्टी और दस्त जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

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