Uncategorized

Kumudni | कुमुदनी ke Fayde

loading...

कुमुदनी

इसे उत्पलिनी, कोई, चंद्रष्टा, कुवलयिनी, नीलोत्पलिनी, हलाफूल, नालिफ़ल, श्वेतशुद्धि, पांढरे, कमल, पोयना आदि नामो से जाना जाता है। इसकी सफ़ेद फूल वाली बेल कश्मीर, साइबेरिया और यूरोप में होती है। लाल फूल वाले कुमुदनी भारत के गर्म परदेशो में होते है। नीले फूलो वाली कुमुदनी पूरे भारत वर्ष के गर्म प्रांतो एशिया और अफ्रीका में पाए जाते है।

ये कमल के फूल के समान पानी में पैदा होने वाली एक वनस्पति है। जो लाल, नीले और सफ़ेद रंग के फूल की तरह होते है। इसके फूल कमल के फूल से छोटे होते है। कमल के फूल सूर्य के उदय होने पर खिलते है और सूर्यास्त होने पर बंद हो जाते है। कुमुदनी के फूल रात्रि को चन्द्रमा के उदय होने पर खिलते है और सूर्य के उदय होने पर बंद हो जाते है। इसके फूल पत्ते के ऊपर लगे होते है। उसमे जावित्री के सामान कोष होता है और उसी कोष मे फल भी बन जाता है। कच्ची अवस्था में उसके भीतर लाल दाने रहते है और पकने पर वे काळा पड़ जाते है। इसके फल को धंधोल कहते है और इसकी जड़ को सालक कहते है।

kumuduni-ke-fayde

google

कुमुदनी के फायदे

  1. सफ़ेद कुमुदनी स्वादिष्ट, कफनाशक, रुधिर विकार, दाह, श्रम और पित्त को नाश करने वाली होती है।
  2. इसकी जड़ को पीसकर सेवन करने से पेचिस दूर करती है और निद्रा लाने में सहायक रहती है।
  3. कुमुदनी के फल और फूलो के सेवन से ज्वर और अतिसार में लाभ मिलता है।
  4. चंद्रष्टा के जड़ का पिसा हुआ चूर्ण पेट में जलन, खूनी अतिसार, बवासीर में बहुत फायदा पहुँचता है।
  5. इसके फूलो का काढ़ा बना कर पिलाने से हृदय की धड़कन की समस्या दूर होती है।
  6. आयुर्वेद चिकित्सको के अनुसार नीलमुकुद मीठा, सुगन्धित, शीतल, धातु परिवर्तक होता है।
  7. ये पित्त को नाश करने वाला और शरीर में बल प्रदान करने वाला होता है।

और भी पढ़े

केवड़ा के फायदे | kewda ke fayde hindi me

Sending
User Review
0 (0 votes)
loading...

Leave a Comment