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मलेरिया – Malaria

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मलेरिया – Malaria in Hindi

मलेरिया आम तौर पर संक्रमित फीमेल एनोफेलीज मच्छर(Female Anopheles Mosquito) के काटने के माध्यम से फैलता है। संक्रमित मच्छर प्लासमोडियम परजीवी होते हैं। जब यह मच्छर आपको काटता है, तो परजीवी आपके खून में मिल जाता है।

एक बार परजीवी आपके शरीर के अंदर होते हैं, तो लीवर में प्रवेश करते है, जहां वे परिपक्व होते हैं कई दिनों के बाद, परिपक्व परजीवी रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करने लगते हैं। 48 से 72 घंटों के भीतर, लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर परजीवी बढ़ते हैं, जिससे संक्रमित कोशिकाएं खुली होती हैं।परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करते रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप में मलेरिया बुखार होता है।

विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार 2015 में विश्व की लगभग आधे आबादी मलेरिया से पीड़ित थे मलेरिया आमतौर पर उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु में पाए जाते हैं आइए इसके कारण को जानते है

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मलेरिया के कारण

मलेरिया बीमारी एक परजीवी(Parasite) के कारण होता है, जिसे प्लासमोडियम (Plasmodium) कहा जाता है ये पांच प्रकार के होते है।

मलेरिया के प्रकार

1-प्लासमोडियम फेल्सिफेरम (Plasmodium Falciparum)

प्लाज्मोडियम फेल्सिफेरम परजीवी को सबसे घातक परजीवी माना जाता है, जो कि ज्यादातर संक्रमण और मलेरिया से संबंधित मौतों का कारण बनता है। इस प्रकार के मलेरिया अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं। 2002 में आयोजित एक अध्ययन से पता चला है कि दुनिया में लगभग 2.2 अरब लोग प्लासमोडियम फेल्सिफेरम( इनमें से 25% घटनाएं दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में हुईं और अफ्रीका में लगभग 70%)के शिकार होते है, इस परजीवी द्वारा संक्रमित व्यक्ति को थकान, चक्कर आना, पेट में दर्द, मांसपेशियों की पीड़ा, बढ़े हुए प्लीहा, दौरे, गले में दर्द, जोड़ों में दर्द, उल्टी, मतली, बुखार, सिरदर्द, एनीमिया और कुछ न्यूरोलॉजिकल सम्बंधित बीमारी होती है। इस संक्रमण का मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई बार, चेतना, पक्षाघात और आक्षेप के स्तर में परिवर्तन भी होते हैं।

2-प्लासमोडियम विवेक्स (Plasmodium vivex)

यह दुनिया भर में फैला हुआ है। भारत में संक्रमण का लगभग 60% प्लासमोडियम विवेक्स द्वारा होता है बल्कि यह शायद ही कभी मौत या अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बनता है, फिर भी यह बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है। इसके कुछ सामान्य लक्षण थकान, दस्त, बुखार और ठंड लगना फ्लू जैसे लक्षण आमतौर से व्यक्ति प्रभावित होता है।

3-प्लासमोडियम ओवेल (Plasmodium Ovale)

यह सभी मलेरिया प्रकारों से काफी असमान्य है, और ज्यादातर घाना, लाइबेरिया, नाइजीरिया और उष्णकटिबंधीय पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्र में पाए जाते हैं। ये परजीवी लाल रक्त कोशिका में फिर से उभरने और आक्रमण करने की संभावना रखते हैं, और मरीज को फिर से बीमार बना देते है।

4-प्लासमोडियम मलेरिया (Plasmodium Malaria)

यह परजीवी काफी दुर्लभ है। इस प्रकार के मलेरिया व्यापक रूप से नहीं फैलता हैं और भारतीय उपमहाद्वीप में 1 प्रतिशत से कम संक्रमण के लिए जाना जाता है। दक्षिण और मध्य अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया और अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लंबे समय से इसका प्रभाव है। यद्यपि यह घातक नहीं है, इसके लक्षण उच्च बुखार और ठंड लगने के रूप होता है।

मलेरिया के लक्षण

संक्रमित मच्छरों के काटने के बाद उसके परजीवी सात दिन बाद से विकसित होना प्रारम्भ हो जाते है। इसके लक्षण परजीवी के काटने के आधार पर पहले हफ्ते से तीसरे हफ्ते के बीच दिखना शुरू हो जाता है, कुछ मामलो में छह महीने से साल भर लग सकता है।

मलेरिया के प्रारंभिक लक्षण जैसे:-

  • बुखार और ठंड लगना,
  • सिर दर्द,
  • मतली और उल्टी होना,
  • सामान्य कमजोरी,
  • शरीर में दर्द,
  • मलेरिया होने का एक प्रमुख लक्षण ठंड के 6 से 12 घंटे की अवधि के साथ बुखार, सिरदर्द के साथ चक्कर आना, पसीना होना और थकावट।

गंभीर प्रकार के मलेरिया का कारण प्लासमोडियम फेल्सिफेरम होता है, अगर इसका तुरंत इलाज न हो तो गंभीर परिणाम हो सकता है जैसे:-

  • गंभीर एनीमिया, (लाल रक्त कोशिकाओं के विनाश के कारण)
  • किडनी खराब होना,
  • सेरेब्रल मलेरिया(मस्तिष्क क्षति) – बेहोशी, असामान्य व्यवहार या भ्रम,
  • हृदयवाहिका की समस्या,
  • निम्न रक्त शर्करा, (ब्लड में शुगर की कमी)
  • साँस लेने की समस्या आदि।

यदि आप को मलेरिया का गंभीर लक्षण महसूस हो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करे।

मलेरिया का इलाज

मलेरिया का इलाज प्राथमिक देखभाल चिकित्सक (बाल रोग विशेषज्ञ, परिवार चिकित्सा, आंतरिक चिकित्सा) और साथ ही संक्रामक रोग विशेषज्ञों द्वारा, परजीवी की विशिष्ट प्रजातियों की पहचान के द्वारा, मलेरिया के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर किया जाता है।

सबसे ज्यादा मलेरिया में इस्तेमाल की जानी वाली दवा है:-

  • क्लोरोक्विन, (Chloroquin)
  • डॉक्सासिक्लिन, (Doxacycline)
  • क्विनिन (Quinine)
  • मेफ्लोक्वीन, (Chloroquin)
    आदि।

नोट:-क्लोरोक्विन गर्भवती महिलाओ के लिए मलेरिया होने पर उपयुक्त माना जाता है जिस गर्भवती महिला को क्लोरोक्विन की प्रतिरोधी होती है, उनके लिए क्विनीन इस्तेमाल किया जा सकता है।

मलेरिया से बचने की लिए घरेलु उपाय:-

  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करे।
  • मच्छर को पनपने से रोके।
  • जितना हो सके अपने शरीर को ढक कर रखे।
  • कीट से बचने के लिए आप क्रीम या तेल इस्तेमाल करे जिससे आप को मच्छर न काटे।
  • मलेरिया जैसे बीमारी होने के संभावना से आप चिकित्सक से परामर्श ले कर एंटी मलेरियल दवा ले सकते है।

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