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सेब खाने के महत्वपूर्ण फायदे

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सेब को अमृत कहे तो गलत नही होगा क्योकि वैज्ञानिक की रिसर्च और डॉक्टर की सलाह है की एक सेब रोज खाने से आप सभी रोगों से मुक्त हो सकते है क्योकि इसमे शरीर को आवश्यक तत्व जैसे विटामिनE , विटामिनC , पोटैशियम , कैल्सियम , मैग्नीशियम , विटामिन A , विटामिन B 6 , प्रोटीन आदि पाये जाते है जिससे शरीर तंदुरुस्त व निरोगी रहता है।आप खुद सोचिये की अगर आपकी इच्छा पूरी होती रहे तो क्या आप दुखी होंगे ? आपका जबाब होगा नही उसी तरह अगर शरीर को भी सम्पूर्ण पोषण तत्व मिलते रहे तो क्यों जल्दी रोग होंगे ?

सेब रेशे वाला फल है इसीलिए इसमें में फाइबर भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। सेब को खाने से पाचन तंत्र भी सही रहता है। यह एक अच्छा एंटी ओक्सिडेंट भी है जो मधुमेह, कैंसर, और दिमाग से सम्बंधित बीमारियों को दूर करने में भी मदद करता है। सेब शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को सामान्य करता है। जिससे मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है। आइये और जानते हैं सेब खाने के लाभों के बारे में और देखते हैं कि कैसे यह जादुई फल हमें स्‍वस्‍थ्‍य रखता है।

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सेब खाने के फायदे BENEFITS OF APPLE

जोड़ों का दर्द – पेशाब की जाँच कराने पर यदि पेशाब में अम्ल (Acid) की मात्रा पाई जाये तो सेब खाना लाभदायक है। सेब खाने से जोड़ों का दर्द व गठिया में लाभ होता है। सेब उबालकर, पीसकर, दर्द वाली जगह पर लेप करें।

दाँत गलते हों, छेद हों, मसूढ़े फूलते हो तो खाना खाने के बाद नित्य सेब खायें। इससे दाँत और मसूढे ठीक हो जायेंगे और खराब नहीं होंगे। यह स्फूर्तिदायक फल है।

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बिच्छू काटना – सेब को चटनी की तरह पीसकर जहाँ बिच्छू ने काटा हो, लेप करें तथा सेब खिलायें।

जुकाम – दुर्बल मस्तिष्क के कारण भी सर्दी-जुकाम सदा बना रहता है। ऐसे रोगियों को जुकाम की दवाओं से लाभ नहीं होता। ऐसे लोगों को जुकाम ठीक करने के लिए भोजन से पहले छिलके सहित सेब खाना चाहिए। इससे मस्तिष्क की दुर्बलता भी दूर होती है।

ब्रोंकाइटिस – सर्द ऋतु में खाँसी, जुकाम प्रायः होता रहता है। सर्दी, खाँसी से ब्रोंकाइटिस हो जाता है। दो सेब या नाशपाती (Pears) खाने से पुरानी (क्रानिक) ब्रोंकाइटिस से छुटकारा मिल सकता है। सेब और नाशपाती में कैचिन्स (catechins) नामक एंटी आक्सीडेंट्स कम्पाउंड्स पाये जाते हैं जो फेफड़ों की कोशिकाओं को फ्री-रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक होते हैं। सेब, नाशपाती कच्ची ही खाना लाभप्रद है। क्रानिक ब्रोंकाइटिस के रोगी को लम्बे समय कम-से-कम तीन माह से खाँसी चली आती है और वह कफ अधिकाधिक थूकता रहता है। यह तथ्य अमेरिकन थोरेसिक सोसायटी ने व्यक्त किया है।

सेब फेफड़ों के लिए लाभदायक है। विटामिन ‘सी’, ‘ई’, एवं बीटा केरोटीन, खट्टे फलों, सेब एवं फलों के रस के साथ ही फेफड़ों का भलीभाँति कार्य करने का सम्बन्ध है। जो लोग सेब खाते हैं, उनके फेफड़ों की क्षमता सेब नहीं खाने वालों से अधिक होती है। इसलिए प्रतिदिन सेब खायें। ब्रोंकाइटिस और खाँसी को भगायें।

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खाँसी – पके हुए सेब का एक गिलास रस निकालकर मिश्री मिलाकर प्रातः पीते रहने से पुरानी खाँसी ठीक हो जाती है।

सूखी खाँसी – (1) जब तक खाँसी रहे, सेब पर कालीमिर्च और मिश्री डालकर खाते रहें। गले में खरखरी चलकर आने वाली खाँसी व बार-बार उठने वाली खाँसी में लाभ होगा। (2) नित्य पके हुए मीठे सेब खाते रहने से सूखी खाँसी में लाभ होता है।

अांत्रज्वर (Typhoid) – आंत्रज्वर में सेब का रस बहुत लाभदायक है।

हृदय-शक्तिवर्धक – सेब का मुरब्बा 15-20 दिन खाने से हृदय की दुर्बलता, दिल बैठना ठीक हो जाता है।

उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) –उच्च रक्तचाप होने पर दो सेब नित्य खाने से लाभ होता है। उच्च रक्तचाप में सेब खाने से पेशाब अधिक व जल्दी-जल्दी आता है। इससे शरीर का नमक बाहर निकल जाता है। गुर्दो को आराम मिलता है।

स्मरण-शक्तिवर्धक – जिन व्यक्तियों के मस्तिष्क और स्नायु दुर्बल हो गए हो, विद्यार्थियों को याद नहीं रहता हो, उन्हें सेब खाना चाहिए। सेब के सेवन से नाड़ियों की शक्ति व स्मरण-शक्ति बढ़ जाती है तथा बेहोशी, उन्माद, चिड़चिड़ापन में लाभ होता है। इसके लिए एक या दो सेब बिना छिले चबा-चबाकर भोजन से पन्द्रह मिनट पहले खायें।

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अधिक प्यास – सेब का रस पानी में मिलाकर पीने से प्यास कम लगती है। जिन्हें वायु विकार हो, उन्हें यह लाभदायक नहीं होगा।

पथरी – गुर्दे और मूत्राशय में पथरियाँ बनती रहती हैं। ऑपरेशन कराके निकाल देने के पश्चात् भी प्रायः पथरी बन जाती है। सेब का रस पीते रहने से पथरी बनना बन्द हो जाता है तथा बनी हुई पथरी घिस-घिसकर मूत्र द्वारा बाहर आ जाती है। यह वृक्कों तथा मूत्राशय को शुद्ध करता है, गुर्दे का दर्द दूर होता है। यदि कुछ दिन केवल सेब ही खाकर रहें तो पथरी निकल जाती है। अधिक भूख लगे तो अन्य शाक, फल खायें।

बहुमूत्र – सेब खाने से रात को बार-बार मूत्र जाना कम हो जाता है।

सिरदर्द – सेब पर नमक व कालीमिर्च लगाकर 20-25 दिन खाने से सिरदर्द में लाभ होता है। एक या दो सेब नमक व कालीमिर्च लगाकर प्रातः भूखे पेट चबा-चबाकर नित्य खायें। इसके बाद गर्म पानी या गर्म दूध पियें।

अनिद्रा (Insomnia) – (1) अनिद्रा होने पर सेब का मुरब्बा खाने से निद्रा आने लगती है। सेब खाकर सोना भी नींद लाने में सहायक है। (2) एक सेब के छोटे-छोटे टुकड़े करके दो गिलास पानी में उबालें। फिर ठण्डा करके सेब को मसल कर पानी छानकर स्वादानुसार नमक मिलाकर पीने से नींद आती है।

बच्चों के दस्त – जब बच्चों को दूध नहीं पचता हो, दूध पीते ही कै और दस्त आते हों तो उनका दूध बन्द करके थोड़े-थोड़े समय के बाद सेब का रस पिलाने से कै और दस्तों में आराम आ जाता है। पुराने दस्तों में सेब का रस लाभदायक है। मरोड़ लगकर होने वाले बड़े लोगों के दस्तों में भी यह लाभदायक है।

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सेब का रस खून के दस्तों को बन्द करता है। दस्तों में सेब बिना छिलके वाली होनी चाहिए। दस्तों में सेब का मुरब्बा भी लाभदायक है। सेब के छिलके उतारकर छोटे-छोटे टुकड़े करके दूध में उबालें। इस दूध का आधा कप प्रति घण्टे से पिलाने से दस्त विशेषकर गर्मी में होने वाले दस्त बन्द हो जाते हैं।

उल्टी – सेब के रस में स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर पीने से उल्टी होना बन्द हो जाता है।

गर्भावस्था की उल्टी – सेब के बीज आधा चम्मच, दो कप पानी में डालकर उबालें। एक कप पानी रहने पर छानकर सुबह-शाम पियें। गर्भावस्था में होने वाली उल्टियाँ बन्द हो जायेंगी।

ई-कोलाई – सेब व दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं। उबला सेब व दालचीनी उल्टी-दस्त के रोगियों के लिए लाभकारी है क्योंकि इनमें ई-कोलाई नाम के बैक्टीरिया को मारने की क्षमता होती है। क्रीम न मिलाएँ तो रोगियों को तुरन्त आराम मिलेगा।

यकृत (Liver) – सेब यकृत-रोगों में लाभदायक है। इससे यकृत को शक्ति मिलती है।

गैस – सेब का रस पाचन अंगों पर एक पतली तह चढ़ा देता है जिससे वे संक्रमण और बदबू से बचे रहते हैं। वायु उत्पन्न होना रुक जाता है। मलाशय और निचली आँतों में दुर्गन्ध, संक्रमण नहीं होता। सेब का रस पीने के बाद गर्म पानी पीना चाहिए।

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अाँतों में घाव, शोथ रहने पर सेब का रस पीते रहने से आराम मिलता है।

कब्ज़ – प्रातः भूखे पेट तथा खाना खाने के बाद शाम को एक सेब खाने से कब्ज़ दूर होती है। सेब का छिलका दस्तावर भी होता है। कब्ज़ वालों को सेब छिलके सहित खाना चाहिए, दस्त वालों को बिना छिलके के।

कृमि – दो सेब रात को सोते समय कुछ दिन, कम-से-कम सात दिन, खाने से कृमि मरकर मल के साथ बाहर आ जाते हैं। सेब खाने के बाद रात भर पानी न पियें।

त्वचा – सेब के रस में शहद मिलाकर नित्य दो बार चेहरे पर लगायें। इससे सर्दी के मौसम में त्वचा की कोमलता बनी रहती है।

यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो आपको चाहिए कि एक सेब को अच्छी तरह पीस लें और उस लुगदी की पतली तह चेहरे पर चढ़ा लें। दस मिनट बाद गर्म पानी से धो डालें।

मस्से (warts) – खट्टे सेब का रस मस्सों पर लगाने से मस्सों के छोटे-छोटे टुकड़े होकर जड़ से गिर जाते हैं।

शराब की आदत – सेब का रस बार-बार पीने से, अच्छी तरह पका हुआ एक-एक सेब नित्य तीन बार खाते रहने से शराब पीने की आदत छूट जाती है। नशे के समय सेब खाने से नशा उतर जाता है। इसका रस भी पिया जा सकता है। भोजन के साथ सेब खाने से भी शराब की आदत छूट जाती है। उबले हुए तीन सेब नित्य तीन बार खाने से कुछ ही दिनों में शराब पीने की लत छूट जाती है।

मानसिक रोग, कफ, खाँसी, यक्ष्मा में सेब का रस, इसका मुरब्बा लाभप्रद है।

भूख न लगना – (1) खट्टे सेब का रस एक गिलास, स्वाद के अनुसार मिश्री मिलाकर कुछ दिन तक नित्य पीने से भूख अच्छी तरह लगने लगेगी। (2) खट्टे सेब के रस में आटा गूंधकर रोटी बनाकर नित्य खायें। (3) एक गिलास सेब के रस में मिश्री मिलाकर पीने से भूख अच्छी लगती है। (4) प्रातः भूखे पेट सेब खाने से भूख अच्छी लगती है।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए नित्य 300 ग्राम कार्बोहाइड्रेट लेने का प्रयत्न करें। एक सेब में 21 ग्राम प्रोटीन होता है।

मोटापा बढ़ाना – एक सेब काटकर रात भर चाँदनी या खुले में रखें। प्रातः इस प्रकार चालीस दिन खायें, मोटापा बढ़ जायेगा।

मलेरिया ज्वर – ज्वर में सेब खाने से ज्वर जल्दी ठीक होता है। मलेरिया में ज्वर आने के पहले सेब खाने से ज्वर आने के समय, ज्वर नहीं आता।

बच्चों के पेट के रोगों में नित्य सेब खिलाना लाभदायक है।

मात्रा – एक बार में एक से तीन सेब तक, जितने खाए जा सकें, खायें।

सावधानी – गला बैठने पर सेब न खायें। गाने वाले सेब न खायें।

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